सोमवार, 15 जून 2020

बोवारा चालू होही

बोवारा चालू होही 

छत्तीसगढ़ ल धान के कटोरा कहे जाथे येहा सत्य हरय इंहा नाना  किस्म के धान बोय जाथे। किस्म किस्म के बीज मिलथे धान के अउ पूरा विश्व म इंहा के चावल ल पसन्द करे जाथे। धान के संगे संग मक्का, सोयाबीन, रहेर, उरीद अउ सब्जी बर तको प्रसिद्ध हवय। किसान के किसानी जांगर रहत ले करिथे, छत्तीसगढ़ ह खेती किसानी वाले राज्य हरय, इंहा के आधा ले ज्यादा आबादी ह खेत म निर्भर हवय। आसाढ़ लगे हवय अउ खेत के काढ़ तको छोला गे हवय, धना खेत तको बने ल धर ले हवय, कांटा खुटी तको बिना गे हवय अउ नई साफ होये हवय तेन मन अभी भी करत हवय। मानसून आये के आघु ले खेत ल उपजाऊ बनाये बर जोते ल धर ले हवय जेखर ले नमी बने रहय, जोते अउ मृदा जांच बर आघु हवय, उत्पादन अच्छा होवय कहिके किसान मन खेत के काम म लगे हवय अउ साफ सफाई करत हवय। खेती किसानी म बर्बाद हो जाथे तभो किसान मन किसानी ल नई छोड़य जिनगी म करम करत जाथे अउ फल के चिंता बिना बोवारा करथे, कभू कभू तो पानी नई गिरय त फसल ह नुकसान हो जाथे फेर एखर चिंता ल छोड़ फसल उत्पादन करे बर नई छोड़य, सबके पेट भरे के काम किसान करथे, अपन हड़ा ल सकेल के काम करथे अउ सबला भरपुर अन्न देथे। खरीफ फसल के बोवारा के समय होवत हवय, अधिक तापमान अउ आर्द्रता के आवश्यकता होथे। किसानी म इंहा के मन जियत हवय, अउ माटी ल गढ़त हवय, जिनगी म किसान के रहत ले इंसान सुख रही जिये बर खाय बर लगही जेन ल किसानी ले उपजे जाथे। बोवार चलत हवय, खेत के मेड़ ल साफ सुधरा कर डरे हवय, धान के थरा दे के काम चलत हवय, थरा म उपज अब्बड़ होथे, थरा ह 15-20 रोज म रोपा लगाए बर हो जाथे, धना खेत ल जोत के अउ पानी भरके मताके ओमा परहा लगाए जाथे। धान ह सोन कस चमकथे, सोनहा कस बाली ह लहराथे। बोवारा के बेरा म अरहर ल छिच देथे या फेर बोवारा करे के मसीन ले बोये जाथे जेखर से एक सीधा म बोवा जाथे, अइसने सोयाबीन ल तको बोय जाथे। बोवारा करके किसान मन पानी पलोथे या फिर बादर ह बरस जाथे त नई लगय, अउ फसल ल पर्याप्त मात्रा म पानी मिल जाथे, नींदा ल निंदानाशक डालके खत्म करे जाथे या फेर बेरा बेरा म ओला नींदे जाथे, तेखर सेती फसल ह कचरा म नई डूबय अउ फसल के पैदावार तको बने होथे। बोवारा चालू होथे तहाँ किसान मन पानी तिहार, माटी तिहार, बादर तिहार, अन्न तिहार, बोवारा तिहार, पेड़ तिहार आदि मनाथे अउ फसल अच्छा होवय ओखर दुआ मांगथे।  खरीफ फसल म कोदों, दुबी, मकड़ा, गाजर घास, धतूरा, कनकवा, मोथा, बड़े दूधी, साठी आदि होथे जेन ह अधिक मात्रा म  पोटेशियम, नाइट्रोजन, फास्पोरस, पोटाश, मैग्नीशियम, कैल्शियम ल ले अपन उपजे बर ले लेथे तेखर बर बीच बीच म किसान मन दवा डालत रहिथे।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा" 
छाँटा, पोस्ट-कोको, कवर्धा

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें