हमर राज के 17वा स्थापना दिवस...
कोनो राज ल महतारी के दरजा मिले हवय ओमा सिर्फ हमर छत्तीसगढ़ राज ल छत्तीसगढ़ महतारी के नाम ले जाने जात हवय, हमर राज ल बने अब 17 बरस होगे हवय 2 नवम्बर 2000 म बनिस हवय अउ हमार महतारी भाखा ल 29 नवम्बर के अपनाए गे हवय छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के गठन होए के बाद म हमर भाखा ल नवा दिशा मिलस हवय, अउ जन जन के भाखा हरय जेन छत्तीसगढ़ म निवास करत हवय सब पहली आखर छत्तीसगढ़ी के सुनथे। राज दिन ब दिन तरकी करत जात हवय, कोनो राज के गठन होय के बाद जेन राज विकास करसि हवय ओमा हमर राज पीछे नई हवय हमेशा आगे हवय, लोग दिन के दिन बुद्धिमान होवत जात हवय, कुछ बरस पहली आईआईटी भिलाई के स्थापना होइस हवय गर्व के बात हरय अउ हमर राज में रायपुर म भारत के प्रसिद्ध मेडिकल एम्स हवय। साहित्य जगत ल छत्तीसगढ़ी के कोनो नई भूला सकय, लोग यहाँ जिजीविषा ले लगातार सँघर्ष करत हवय अउ अपन मेहनत के बल म जागरूक होवत जात हवय। सिक्छा, रोजगार, नौकरी रोचकता अउ सहजता से मिलत हवय, सरकार ने तो गरीबी रेखा के नीचे रहने वालो को चावल भी देवत हवय जेखर ले सब्सिडी मिलत हवय। छत्तीसगढ़ के स्वरूप ल देख अउ नवा राज बनाये के सपना चंदूलाल चंद्राकर जी के आवय अउ ओखर सपना साकार होगे लेकिन जेन सोच के सपना देखे रहिस हवय वो सायद अभी तक अधूरा हवय। छतीसगढ़िया सबले बढ़िया आज सिर्फ अउ सिर्फ नारा बनके हवय, कोनो आथे अउ अपना पसरा जमा के बैठत हवय, फेर हमन पहुना के स्वागत घर आथे त करथन वइसने आज कोनो आथे तेखर करत हवन। विकास देखबे त राजधानी ल छोड़ कोनो कोति नई हवय सड़क उखड़े हवय,नाली जाम हवय, अउ स्वच्छता अभियान चलात हवय फेर दुरुग भिलाई के रेलवे पटरी के किनारे म रोज कचरा बगरे रहिथे, धीरे धीरे विकास होवत जात हवय, नवा राज बने के बाद एक ठन सक्कर फेक्ट्री रहिस हवय आज 3ठन होगे हवय, अउ 7-8 ठन सीमेंट फैक्टरी हवय, एशिया के सबले बड़का जन प्लांट भिलाई इस्पात संयंत्र छत्तीसगढ़ म हवय। लोक कला के माध्यम ले तीजन बाई ह हमर छत्तीसगढ़ी भाखा के प्रदर्शन विदेश में करे हवय अउ पंडवानी ल सबो जगह म बगराये हवय। हमर राज म संसाधन के कमी नई हवय देवभोग म हीरा के खान हवय अउ दल्लीराजहरा म लोह अयस्क के संसाधन उपलब्ध हवय छत्तीसगढ़ ल "धान के कटोरा" कहिथे इहाँ किस्म किस्म के धान पाये जाथे अउ हमर राज के खानपान म सबले जादा भात पाये जाथे। हमर संस्कृति, रहन सहन, वेशभूषा , लोककला, लोकनृत्य सभी अलग है और खास बस्तर की विशेषता ही अलग हवय अपन बस्तर कला बर प्रसिद्ध हवय अउ लोक संस्कृति के धरोहर आवय प्रकृति ले सीखे हवय अउ आज उन्नीत के ओर अग्रसर हवय यह कहना अनुचित नई हवय की हमर राज के कोनो क्षेत्र म प्रगर्ति नई होवत हवय, आज सबो जगह कुछ न कुछ काम होवत जात हवय पढ़ाई के क्षेत्र म ,रोजागर के क्षेत्र म, नौकरी के क्षेत्र, सभी दिशा म विकास होवत हवय।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-18वर्ष 'बीएससी प्रथम वर्ष का छात्र'
दुर्ग साइंस कॉलेज दुर्ग में अध्ययनरत
रामनगर, कवर्धा,छत्तीसगढ़
मो.-8085686829