प्यास बुझावत नई हे
अब्बड़ गरमी बढ़त हवय
नदिया तरिया सुखावत हवय
बोरिंग अउ बोर म पानी नही
मुह ह सुखावत हवय।
चारों कोति सूखा परे हवय
खेत खार म दरा होगे हवय
आगी कस घाम हवय
गरम गरम हवा चलत हवय।
लू झन लगय अब्बड़ गरमी हवय
कहिके गोंदली धरे घुमत हवन
करसि के पानी जुड़ावत नई हे
पानी ह गरम गरम हवय।
मनखे मन ठंडा पानी पा जाथे
फेर जानवर मनके काय होही
पंखा कूलर म हवन हमन
जीव जंतु मन ल घाम जनावत हवय।
प्रदूषण हटाये के जरूरत हवय
तभे गरमी कम होही
पेड़ पौधा के संरक्षण करे ल पड़ही
तभे सबके प्यास बुझाहि।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-19वर्ष
साइन्स कॉलेज दुर्ग में अध्ययनरत
रामनगर,कवर्धा,छत्तीसगढ़