सोमवार, 18 सितंबर 2017

नवरात के दिन आगे

नवरात के दिन आगे

दुरगा माता के पूजा दिन आगे,
जोत जवार के दिन आगे।

राम मंडली करथे संगी मन,
दुरगा माता के पूजा करहि।

झगमग झगमग जोत जले
महमाया, देवालय म जोत जले।

भजन कीरतन दिन रात होथे,
नवरात  के मान ल बढ़ाथे ।

देवी दाई के पूजा करथे,
मनखे मन गोहार लगथे।

नव दिन के उपास रहिथे,
अपन श्रद्धा के बखान करथे।

जसगीत महिमा के बखान होथे,
पूजा पाठ बिधि विधान से होथे।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-18वर्ष 'बीएससी प्रथम वर्ष का छात्र'
रामनगर, कवर्धा, छत्तीसगढ़




शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

कोनो ठिकाना नई दिखत हवय

कोनो ठिकाना नई दिखत हवय

बोनस देवत हवय धन वोट बर करत हवय
रमन ह सत्ता म बइठे रहिना हवय कहत हवय
राजनीति चोरों कोति गरमाये हवय
येति तेती चारो कोति कोनो न कोनो
दिखत हवय।

का होही हमर राज के येला तो कोनो बताही
पानी के रद्दा देखत किसान मनके
आँखी म पानी आवत हवय
कहु अकाल झन आवय
कोनो ठिकाना नही दिखत हवय।

घेरी बेरी पानी गिरत हवय
गरमी के दिन म का होही
अभी डपकत हवय वो बेरा म का होही
भुइयां के जलस्तर ह गिरत हवय
कोनो ठिकाना नजर नई आत हे।

सरकार तो असवांसन दे दिच
फेर का होही जब खेती नई होही
दु चार ठन बांध बनवाये रहितच
जगह जगह म त काम आतिच
एके बेरा म अकाल दिखत हवय।

घुगुवा कस बेठे रहिहि त का होही?
हमर राज ल धान के कटोरा कहिथे
फेर आज अकाल आवत दिखत हवय
पानी गिरत नई हे किसान मन दुख हवय
कोनो कोति रद्दा नई दिखत हवय
कोनो ठिकाना नई दिखत हवय।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-18वर्ष, बीएससी फर्स्ट ईयर की छात्र
रामनगर,कवर्धा, छत्तीसगढ़