कोनो ठिकाना नई दिखत हवय
बोनस देवत हवय धन वोट बर करत हवय
रमन ह सत्ता म बइठे रहिना हवय कहत हवय
राजनीति चोरों कोति गरमाये हवय
येति तेती चारो कोति कोनो न कोनो
दिखत हवय।
का होही हमर राज के येला तो कोनो बताही
पानी के रद्दा देखत किसान मनके
आँखी म पानी आवत हवय
कहु अकाल झन आवय
कोनो ठिकाना नही दिखत हवय।
घेरी बेरी पानी गिरत हवय
गरमी के दिन म का होही
अभी डपकत हवय वो बेरा म का होही
भुइयां के जलस्तर ह गिरत हवय
कोनो ठिकाना नजर नई आत हे।
सरकार तो असवांसन दे दिच
फेर का होही जब खेती नई होही
दु चार ठन बांध बनवाये रहितच
जगह जगह म त काम आतिच
एके बेरा म अकाल दिखत हवय।
घुगुवा कस बेठे रहिहि त का होही?
हमर राज ल धान के कटोरा कहिथे
फेर आज अकाल आवत दिखत हवय
पानी गिरत नई हे किसान मन दुख हवय
कोनो कोति रद्दा नई दिखत हवय
कोनो ठिकाना नई दिखत हवय।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-18वर्ष, बीएससी फर्स्ट ईयर की छात्र
रामनगर,कवर्धा, छत्तीसगढ़
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