नवरात के दिन आगे
दुरगा माता के पूजा दिन आगे,
जोत जवार के दिन आगे।
राम मंडली करथे संगी मन,
दुरगा माता के पूजा करहि।
झगमग झगमग जोत जले
महमाया, देवालय म जोत जले।
भजन कीरतन दिन रात होथे,
नवरात के मान ल बढ़ाथे ।
देवी दाई के पूजा करथे,
मनखे मन गोहार लगथे।
नव दिन के उपास रहिथे,
अपन श्रद्धा के बखान करथे।
जसगीत महिमा के बखान होथे,
पूजा पाठ बिधि विधान से होथे।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-18वर्ष 'बीएससी प्रथम वर्ष का छात्र'
रामनगर, कवर्धा, छत्तीसगढ़
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें