सोमवार, 15 जून 2020

आगु के मनखे

आगु के मनखे

बिहान ले रतिया तक कुछु न कुछु करय, बेरा म अपन काम ल करके अपन करम करय, जीवन के जमा पूंजी ल रखे रहय अउ बेरा के महत्व ल समझय। बिहान ले उठय त, रतिया के बचे भात ल बासी खावय। अहि जीवन म बिसोय पूंजी हरय। बिहान होवय त खेत खार जावय, वतके बेरा गाय गरुआ ल बरदी अउ पहट म जाय जेन ल चारए बर राउत लगे रहय। आगु के मनखे मन बासी धरके खेत जावय अउ खेत कमावय। काटा बीने ल खेत बनाय बर खेत बरसात के पहली जावय अउ खेत के कामकाज ल करय। आगु बेरा देखे बर घड़ी नई रहीस हवय त, जब मुड़ी के ऊपर घाम आवय अउ छांव ह मुड़ी के पांव म पड़य त 12बज जय त खेत ले घर आवय। अउ घर म रांधे बर खाना बनाये बर रहय तेन मन छानहि के छांव ल देख के रांधय। गांव म नदिया रहय नई रहय जेन गांव म उन्हा कुँआ अउ तालाब रहय, नहाये बर अउ सौचालय बर उन्हें के पानी ल उपयोग म लाय। बड़े बिहान ले कुँआ ले पानी लेगे बर माईलोग मन लग जाय, कोनो कोनो गांव म एके ठन कुँआ रहय त भीड़ होजय तेखर सेती अब्बड़ मन रतिया कुन बर्तन मांजे बर पानी जोर लय। अंधियारा म जिंदगी बीतय, बिजली के कोनो सुविधा नई रहीस हवय, अंधियार म रतिया कटय, उतार चढ़ाव म जीवन बीतय। आय जाये बर गाड़ी नई रहीस हवय, बैला गाड़ी अउ घोड़ा गाड़ी के उपयोग साधन बर करय, जीवन म कुछ भी सुख दुख के सन्देश आवय त रेंगत रेंगत नाउ ह नई त अधियारा मन बेटीमाई मन घर समाचार लेके आवय तब तक बेरा होगे रहय। जीवन के अलग अलग रूप ह अलग अलग दृस्य दिखाए हवय। जब फसल जादा नई होवय अउ पानी कम गिरय त धान बर पानी कम पड़ जाय अउ खेतखार म बन ह बड़े बड़े जाम जय त दुकाल पर जावय, जीवन म किसान मन बर ये ह सबले बड़े दुख रहय, खाये के लाले पड़ जावय त कोदो बोवय, असाढ़ म बोतीस त कार्तिक म अन्न हो जय, 60 दिन लगय। अउ ओला मिंज के घर म लावय अउ जबतक दूसर फसल बर पानी नई मिलय तब तक ओहि जीवकोपार्जन बर रहय। जीवन ह एक तरह ले अलग थलग रहय, जेन भी काम रहय ओला कर लय। दाऊ, जमींदार मन घर तको दुकाल परय, खाये बर कुछु नई रहय, पानी गिरय त गाय गरुआ मन बर तको पिये बर होवय, पहली बोर नई रहीस हवय, नदिया रहय नई त कुँआ अउ तालाब रहय, जेखर पानी म अउ बरसात के पानी म जीवनयापन करय। आजादी के बाद बिजली गाँव मन म आत गे हवय, तब जाके सुख सुविधा हवय, नही त आगु के मन जीवनयापन अब्बड़ दुख म करे हवय, फेर सुख तको रहिस हवय, आगु गरमी कम रहय अब तो भोम्भर जरत हवय अउ मनखे मन बाहर निकली गरमी त टघल तको जहि एकोदिन। आगु के मनखे अउ आज म जमीन के अंतर हवय, विकास म हमन रम गे हवन। आगु के मन नींव रखे हवय ओहि म हमन आगु बढ़त हवन।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
बीएससी अध्ययनरत
रामनगर,कवर्धा,छत्तीसगढ़

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