मंगलवार, 2 अप्रैल 2019

लोहार के दरद

लोहार के दरद

लोहार के जिंदगी ह छोटे मोटे काम ले गुजरत हवय।लोहार ह अपन काम म महारत हासिल करे हवय, ओला सबो प्रकार के अब्बड़ अकन औजार बनाये बर आथे ; कुदरा, कुदरी, रापा, गेती, साबर,छिनी, हाथोडी अउ खेती करे के किस्म किस्म के औजार बनाथे। लोहार ह अपन काम ल बखूबी करय फेर जब ले टेक्टर हारवेस्टर आए हवय तब ले उखर धंधा चोपट होगे हवय अउ उखर काम धीरे धीरे सिरावत हवय।आज के बेरा म लोहार के जिंदगी दरद म हवय, व्यवसाय बंद पड़त जात हवय। अईसन म लोहार के तको दरद हवय, ऐति कोती काम बर घुमत हवय। लोहार मन के गांव म अब्बड़ महत्व हवय, हरेली तिहार के दिन घर घर म जाके कपाट के चौखट म खिला गड़ियाथे अउ ओखर बाद नीम के पत्ता ल गांव के सबो घर म खोचथे, अउ ओला सेर चाउर मिल जाथे अहि ओखर जीवन के पूंजी हरय। कलात्मक  रूप ले अब्बड़ सम्पन्न हवय फेर आर्थिक स्थिति ले कमजोर। उंखर कमाई के जरिया लोहा के औजार बनाके हवय, आज के आधुनिक युग म सब बने बनाय मिलत हवय अइसना म लोहार के दरद ल लोहार ही समझ सकत हवय, चार पैसा आय के आवक रहीस हवय तेनो म आकाल पड़गे हवय।दिन बादर ल जोहत रहिथे एक झन तको आ जहि कुछ बनवाये बर त बने हवय फेर ओखर दुख ल होही जानथे।छिनी, हाथोडी,हसिया, टँगीय ल धार करथे अउ ओखर बदला म जेन ह टेम्वाय बार लाथे जिनिस तेन ह सेर चाउर अउ कोइला देथे। कोइला के बदला म औजार बनाये के काम करथे। आज सम्पन्न होगे हवय सब त लोहार के चूल्हा तको थकगे हवय जेन भी काम होथे कुछु कुछु काम होथे, आज के बेरा म पैसा म काम करथे फेर लोहार के महत्व जेन गाँव म हवय ये ह हमर छत्तीसगढ़ म बस नही उत्तरप्रदेश, उड़ीसा, झरखंड, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, राजस्थान म तको हवय, ये मन पौनी पसारी जाति म आथे अउ हमर छत्तीसगढ़ म पौनी पसारी के बिना गाँव के आँचल ह अधूरा हवय, हमर तीज तिहार, बर बिहाव के नेग मन अधूरा हवय। पौनी पसारी जाति म बरेठ, कुम्हार, नाउ, मोची, राउत, लोहार अउ बईगा आथे, इंखर बिना गांव म रौनकता नई हवय, सब जुर मिलके गाँव बनथे। फेर आजकल सब नदावत हवय, व्यवसाय म अकाल आगे हवय जेन बेरा ले आधुनिकता म विकास होवत हवय, वइसने म गाँव के महक म गंवात हवय।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-20 वर्ष 'बीएससी अध्यनरत'
रामनगर,कवर्धा
मो.-8085686829

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