अब्बड़ गरमी हवय संगी।
तपत हवय घाम ह दिन के दिन,
भमकत घर जुड़ावत नई हवय।
अभी दिन बादर दिखत नई हवय,
संगी अब्बड़ गरमी जनावत हवय।
रद्दा म मंझनियाकुन कोनो नई रहय,
भोमभरा जनावत हवय।
पियाज ल धरे - धरे घुमत हवन
लू के डर ले कहु जावत नई हवन।
आमा के अमचुर खावत हवन,
गुराम अउ पना आमा के बनथे।
संगी अब्बड़ गरमी जनावत हवय,
चरचरले घाम दिखत हवय।
पानी म डूबे रह तइसने लगथे,
दिनभर एसी कूलर म धंधाये हवय।
देखत देखत नवतपा लगे,
अब तो अब्बड़ गरम होही।
जेठ आवय संगी घाम हवय,
ये घाम ह सुहावत नई हे।
पेड़ ल मत काटाव ओला बचावा,
नई त एकदिन सब माटी म मिल जहि।
'अमित' अभी तो अउ गरम होही,
मनखे मन पृथ्वी छितिर बितिर करत हवय।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-18वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर कवर्धा छत्तीसगढ़
मो.-8085686829
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