मंगलवार, 31 जनवरी 2017

बिहाव के बेरा आवत हे

बिहाव के बेरा आवत हे।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"

छितिर-बितिर परे हे घर अऊ आँगना
आवत हवय शादी-बिहाव के बेरा
संगी आगे हवय गहूँ लुये के बेरा
'अमित' कहिथे संगी आगे बिहाव के बेरा....

बाप के सर म हवय दहेज के बोझ
अपन बेटी ल वो खाली नई भेजय
जेन ल नई देखे हवय तेन ल देथे
अपन बेटी के बिहाव सुघ्घर करथे।

पहुना घर म आहि रे संगी
देखत देखत म आगे बेरा
बिहाव म सुहारि रसगुला लाड़ू बनहि
पहुना मन जम के खाहि संगी।

चार दिन के बिहाव संगी मिलजुल के करथे
चुरमाटी देवतेला हरदाहि बारात बिदाई
बेटी ढोला बेठहि बाप के प्यारी बेटी
दूसर के घर म जाथे अपन बना लेथे संगी

सबके लाड़ली ससुराल म जाथे बेटी
अपन मान रखथे, अपन धरम निभथे
सास-ससुर के हर काम करत हवय बेटी
अपन जिनगी ल अपन परिवार बर दान करथे।

कबहु आँच नही आन देवय
हमेशा अपन घर ल सजाके सुघ्घर रखथे
चार दिन के बिहाव के बाद
बेटी ससुराल में खुश रहथे
अपन धरम ल निभथे।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-17वर्ष रामनगर कवर्धा

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